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एक ही कड़े की जांच में दो अलग-अलग रिपोर्ट से गरमाया सराफा बाजार, बड़ी संख्या में कारोबारी पहुंचे; पुलिस ने मशीन और डीवीआर कब्जे में लिया

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बिलासपुर। शहर के सराफा बाजार में 15 अगस्त को सोने की शुद्धता की जांच को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। सदर बाजार स्थित एसके ज्वैलर्स से खरीदे गए एक सोने के कड़े की मालाबार ज्वैलर्स में जांच के दौरान कथित तौर पर पहले 20 कैरेट की रीडिंग सामने आई, जबकि दोबारा जांच करने पर वही कड़ा 22 कैरेट बताया गया। एक ही आभूषण की जांच में अलग-अलग परिणाम सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया और बड़ी संख्या में सराफा कारोबारी मालाबार ज्वैलर्स पहुंच गए। मामला बढ़ने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच मशीन और डीवीआर को कब्जे में लिया है।

ग्राहक की जांच से शुरू हुआ विवाद

बताया जा रहा है कि सदर बाजार स्थित एसके ज्वैलर्स से एक ग्राहक ने सोने का कड़ा खरीदा था। ग्राहक किसी अन्य कारोबारी को आभूषण देने अथवा उसकी बिक्री से पहले उसकी शुद्धता की जांच कराना चाहता था। इसी सिलसिले में वह श्रीकांत वर्मा स्थित मालाबार ज्वैलर्स के शोरूम पहुंचा।

शोरूम में मौजूद कैरेटोमीटर मशीन से कड़े की जांच की गई। आरोप है कि मशीन पर कड़े की शुद्धता 20 कैरेट बताई गई, जबकि ग्राहक के अनुसार उसे 22 कैरेट का कड़ा बताया गया था।

ग्राहक ने इसकी जानकारी एसके ज्वैलर्स के संचालक सागर सोनी को दी। इसके बाद सागर सोनी स्वयं ग्राहक के साथ मालाबार ज्वैलर्स पहुंचे और कड़े की दोबारा जांच कराई गई।

दूसरी जांच में 22 कैरेट की रीडिंग

मालाबार ज्वैलर्स में दोबारा जांच के दौरान कथित तौर पर उसी कड़े की रीडिंग 22 कैरेट आई। एक ही कड़े की पहली जांच में 20 कैरेट और दूसरी जांच में 22 कैरेट परिणाम आने के बाद मौके पर विवाद की स्थिति बन गई।

मामला केवल मशीन की रीडिंग तक सीमित नहीं रहा। आरोप है कि इस दौरान शोरूम में मौजूद एक कर्मचारी द्वारा एसके ज्वैलर्स के संचालक के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद एसके ज्वैलर्स संचालक ने घटना की जानकारी सराफा एसोसिएशन के पदाधिकारियों को दी।

बड़ी संख्या में मालाबार ज्वैलर्स पहुंचे कारोबारी

विवाद की जानकारी सराफा एसोसिएशन तक पहुंचने के बाद 15 अगस्त को प्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल सोनी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में सराफा कारोबारी और संघ के पदाधिकारी मालाबार ज्वैलर्स के शोरूम पहुंचे।

व्यापारियों ने पूरे घटनाक्रम को लेकर जवाब मांगा। इस दौरान शोरूम के बाहर काफी देर तक गहमागहमी की स्थिति बनी रही। कारोबारियों का कहना था कि सराफा व्यापार में किसी भी आभूषण की शुद्धता का सवाल सीधे कारोबारी की साख और ग्राहक के भरोसे से जुड़ा होता है।

सराफा संघ की ओर से कथित अभद्र व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई गई और संबंधित पक्ष से माफी की मांग की गई।

पुलिस पहुंची, मशीन और डीवीआर कब्जे में

विवाद बढ़ने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। मामले से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस ने सोने की जांच में इस्तेमाल की गई कैरेटोमीटर मशीन और डीवीआर को कब्जे में लिया है।

अब पुलिस जांच में डीवीआर की रिकॉर्डिंग और मशीन की जांच प्रक्रिया अहम मानी जा रही है। रिकॉर्डिंग से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि पहली जांच के दौरान मशीन पर क्या रीडिंग आई थी और बाद में दोबारा जांच में परिणाम किस तरह बदला।

मशीन की तकनीकी जांच भी महत्वपूर्ण

पूरे मामले में मशीन की तकनीकी स्थिति और कैलिब्रेशन भी महत्वपूर्ण बिंदु हैं। जांच में यह देखा जाना होगा कि मशीन उस समय सही तरीके से काम कर रही थी या नहीं और दोनों जांचों के दौरान प्रक्रिया समान थी या नहीं।

हालांकि, किसी आभूषण की वास्तविक शुद्धता की अंतिम पुष्टि अधिकृत जांच प्रक्रिया से ही हो सकेगी। फिलहाल विवाद अलग-अलग मशीन रीडिंग को लेकर है और पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

सबसे बड़ा सवाल—एक ही कड़े की दो रीडिंग कैसे?

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पहली जांच में कड़ा 20 कैरेट बताया गया तो दूसरी जांच में वही कड़ा 22 कैरेट कैसे निकला? क्या मशीन की रीडिंग में तकनीकी अंतर आया, जांच की प्रक्रिया अलग थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी—इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।

कारोबारियों ने उठाया साख का मुद्दा

सराफा कारोबारियों का कहना है कि सोने की शुद्धता को लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी का असर सीधे व्यापारियों की प्रतिष्ठा पर पड़ता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में कारोबारी मालाबार ज्वैलर्स पहुंचे और मामले में स्पष्ट जवाब की मांग की।

प्रदेश सराफा एसोसिएशन अध्यक्ष कमल सोनी ने ग्राहकों से भी अपील की कि सोने के आभूषण खरीदते समय हॉलमार्क, बिल और गुणवत्ता से संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखें।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर

फिलहाल पुलिस के कब्जे में मशीन और डीवीआर होने के बाद जांच आगे बढ़ेगी। पुलिस रिकॉर्डिंग, मशीन की तकनीकी स्थिति, जांच प्रक्रिया और मौके पर मौजूद लोगों के बयान समेत अन्य पहलुओं को जांच में शामिल कर सकती है।

अब सबसे अहम यह है कि अधिकृत जांच में कड़े की वास्तविक शुद्धता क्या सामने आती है और पहली तथा दूसरी मशीन रीडिंग में अंतर की वजह क्या थी। जांच पूरी होने के बाद ही 20 और 22 कैरेट की अलग-अलग रीडिंग के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

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